Guest Post, Poetry

Guest Post – बचपन

आज जाने क्यों अचानक ही स्मरण हो आई

ये पंक्ति कि वे दिन भी क्या दिन थे ,

जब खाते थे टॉफी – चॉकलेट गिन-गिन के ,

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हँसते-खेलते-कूदते-फाँदते ,

            कुछ यूँ ही बीतता था हर लम्हा , हर पल

            जब न थी कोई चिंता , न कोई परेशानी

            कि हाय , अब क्या करूँ म क्या होगा कल

हर पल था किसी न किसी का साथ

कभी शिक्षिका , शिक्षक , परिवार का साथ

हर कदम पर चलते थे हम थामे हाथों में हाथ

            आज भी जब उन दिनों को करती हूँ याद

            याद आ जाती है हर एक खट्टी-मीठी शरारत

            हर एक छोटी-सी बात

करती हूँ ईश्वर से यही दुआ

यही शिकायत कि ऐसा क्यों हुआ

हम क्यों हुए बड़े और आए एक ऐसे समाज में

जहाँ रूढ़ियाँ , संप्रदाय , धर्म और नियम भी हैं कड़े

            चाहती हूँ उन बचपन के दिनों में रखना कदम

            जहाँ थी ख़ुशी,उमंग, उत्साह,हास्य ही हर दम

BY:- Akansha Jain 

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